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Monday, 27 July 2015

श्याम नाम का ज्ञान



ता ता थैया धिनक धिनक धिन
पंख पसारे मोर ने
चितवन में आकर चित्त चुराया
श्याम मनोहर चोर ने
राधा रानी व्याकुल बैठी
कुञ्ज गली की ओढ़ पर
श्याम मुरारी मिलन न आये
न रात्रि, साँझ न भोर पर
रूठी राधा मन कुंठित करके
ये प्रेम राग की तान थी
कान्हा की कोई खबर न आई
राधा रानी परेशान थी

सब जग ढूंढा सब जग खोजा
पग पग राह निहारे
अब तो आजा मेरे गिरधारी
मुरली महोहर वाले

कभी इस पल दौड़े कड़ी धूप में
कभी प्रेम अश्रु बहाये
राधा रानी के सौ जतन पर
कृष्णा न मिलने आये

हुई हताश तो बैठी छण भर
दिल में प्रेम अलख जगाई
रोम -रोम से नेत्र मूँद कर
कान्हा की रटन लगायी

प्रकट हुए वो पल भर में
राधे के अंश्रु पोछे
क्यों न आये मिलने मुझसे
राधा रो-रो पूछे

मैं तुम्हे ढूंढने मेरे कान्हा
वन -वन खोजन आई
रो -रो कर राधिका रानी ने
पूरी बात बताई

भरे मुस्कान होठो पर मोहन
मंद मंद मुस्काये
हाथ बढाकर राधा रानी को
पल भर में गले लगाये

बोले राधे भोली हो तुम
थोड़ी सी अपट अनाड़ी
मैं तो तेरे दिल के कोने में
क्यों ढूंढे बाड़ी बाड़ी

तेरे नैनो की छाँव में राधे
मैं अपनी रात गुजारु
तेरे मन के इस द्वार से पगली
मैं तुझको रोज निहारु

राधे मैं कण-कण बसता हूँ
घर घर में मेरा डेरा
मुझसे ही चलता काल चक्र
मुझसे ही साँझ सवेरा

मैं बसता हूँ हर मन-मंदिर में
प्राणी प्राणी के वेश में
मैं तुझमे तू मुझमे बसती
तू क्यों ढूंढे परिवेश में

फिर काहेतू रोवे राधे
फिर काहे तू शोक मनावे
पल भर में मिल जाऊंगा
जो तू कान्हा कान्हा गावे

पल भर में मिल जाऊंगा
जो तू कान्हा कान्हा गावे


सुन राधा हर्षित भई श्याम नाम का ज्ञान|
रेट आलाप आठो पहर गूंजे चारो धाम||
प्रेम दीप की ज्योत से श्याम तुम्हारे होए |
कष्ट निवारे सब जन के जो प्रेमांकुर को बोये ||






by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'

Thursday, 16 July 2015

NILKANTH: Dedicated to Lord Shiva


Four universally burning as flame
Thundering across the reddish sky
All the gods, humans and demons
were frightened and unaware of the consequences

Continue churning the big giant sea
They were tempted for a jackpot, 
unfortunately it was not
But the holocaust, 

naked toxin appeared
The wind seemed to be toxic
Begging for their lives,
all were looking for auspice

They were in need for a savior
Who was? None knew

All were screaming, falling and dying
 A saint appeared behind the toxic mist
Strange personality, awkward but
Assurance of keeping alive

Resonance lift 

Om Namah Shivay Om Namah shivay
Om Namah Shivay Om Namah Shivay

Divine man swallowed the poison
Held on in his throat, called Nilkanth
The world again survived

Universally echo

Om Namah Shivay Om Namah Shivay
Om Namah Shivay Om Namah Shivay



Monday, 29 June 2015

तू जान ले इतना कहीं भगवान भी है

19 .तू जान ले इतना  कहीं भगवान भी है


 

कड़कती धूप भी है कहीं पर छाँव भी है
कहीं वीरान सी धरती बसे कहीं गांव भी है
चमकती सूर्य की किरणों से खिलखिलाता समंदर भी है
डूबे है कई लोग जिनपे नाव भी है
ठिठुरती ठण्ड है तो कही धधकती आग भी है
बने परछाइयों से वक़्त की पहचान भी है
भले तू चाह ले कितना समझना जानना इसको
भले तू जान ले लिखावट पढ़ ले पूरी पुस्तक को
बदल दे तेरे होने के दावे इस दुनिया में आने के
खिलाफत कर बगावत कर या चाहे बन जा सिकंदर तू
तू जान ले इतना कहीं भगवान भी है

तूने नाप ली धरती तो आसमान अब भी बाकी है
उसके वजूद को झुठलाने का तेरा सपना अब भी बाकी है
तुही है धर्म का रक्षक तुही पापो का सागर है
तुझी में बस रहा इंसान तुझी में हैवान भी है
ये मायाजाल दो तरफ़ा है जो देखे वो दिखायेगा
चाहे   निकलना   बाहर   तू   धंसता ही   जायेगा
दिखे है चार क़दमों की दूरी पर तेरी मंज़िल की राहें जो
वही रेत में धंसते तेरे दो पाँव भी है

मिले जो वक़्त थोड़ा सोचे बैठ ये छोटी सी दुनिया
यही तो राह है तेरी यही तेरी मंजिल भी है
यही नफरत की आंधी है तो प्यार का साहिल भी है
यही चलना संभलकर है तुझे यही भटकना भी है
कही सर झुकाना है तो कही झपटना भी है
ये अन्धो की दुनिया है जो आँख वाले हैं
ये बहरों की दुनिया है जो कान वाले हैं
कुछो में बख़्शी है ताकत नेकी की उस बनाने वाले ने
तभी भगवान कहलाने वाले कई इंसान भी हैं

by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'

कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...