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Thursday, 23 July 2015

ये बेजुबान सरहदें



सरहदें
ये बेजुबान सरहदें
कह जाती हैं बहुत सी बातें
अनचाही, अनकही
वो बातें
जो बाँट जाती हैं जमीन और आसमान
लकीरें खींचती हुई पहाड़ो से गुजरती हुई
नदियों के पानी को बांटती हुई
धरती माँ के गर्भ को चीर जाती हैं
सरहदें
ये बेजुबान सरहदें|
कुछ तो बात होगी इसकी बातों में
जो बातों ही बातों में
लोगो की बातों का मतलब बदल देती हैं
मानव हृदय को भेदकर
प्यार के बीज सुखाकर
नफ़रत के बीज बो जाती हैं

सरहदें
ये बेजुबान सरहदें|
काश!
मैं भी बोल पाता इन सरहदों की भाषा
तो नफरत नहीं प्यार बांटता
दिलों को दिलों से जोड़ता
इन सरहदों को ही मिटा देता
सोचता हूँ, जब ये सरहदें
बदल सकती हैं इंसानियत का मतलब
तो मैं भी तो बदल सकता हूँ
इन सरहदों का मतलब
आख़िरकार ये सरहदें
बेजुबान ही तो हैं
काश!
मिट जाएँ ये सरहदें
ये बेजुबान सरहदें|






by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'


Wednesday, 22 July 2015

कोई समझता नहीं कोई समझाना नहीं चाहता

 
कोई समझता नहीं कोई समझाना नहीं चाहता
कोई मानता नहीं कोई मनाना नहीं चाहता
कोई समझता नहीं कोई समझाना नहीं चाहता
पूरी दुनिया खड़ी है तबाही के मंजर पर
कोई रुकता नहीं कोई रूकाना नहीं चाहता

पहले भी देखे हैं बहुत से शहर तबाह होते
मिली है सिर्फ मात ही इस नफरत की जंग में
प्यार की ताकत से जीती जा सकती थी जंग
पर क्या करें कोई जीतता नहीं कोई जिताना नहीं चाहता


किसी ने खोएं हैं बेटे किसी की रो रही ममता
किसी के अश्रु टूटे हैं कोई बहाना नहीं चाहता
कहीं तो जल रही इंसानियत नफरत की आग में
कोई बचता नहीं कोई बचाना नहीं चाहता


फिर भी पलट के देखो इतिहास के पन्नो को
जहाँ नफरत की आंधी चली, वहां फिर बसेरा हुआ
बुझ गए चिराग लौ भी तिलमिला उठी
एक रात ऐसी भी आई फिर सवेरा हुआ
बना इंसान, दिल से पत्थर, हैवान कर्मो से
कोई चाहे छिपता नहीं कोई छिपाना नहीं चाहता




by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA

Tuesday, 21 July 2015

इस दुनिया में मैं भी चलना सीख रहा

इस दुनिया में मैं भी चलना सीख रहा
मैं भी चलना सीख रहा इस दुनिया में
इस दुनिया में मैं भी चलना सीख रहा
भ्रमित कर रहे लोग सभी जैसे दुनिया एक जंजाल है
हृदय हुआ पाषाण सभी का यह अब नर का कंकाल है
हसना गाना भूल गए जो अब दुःख के आंसू रोते है
मतलब की इस दुनिया में अब कौन से अपने होते है
हुआ मुख़ाबीर इस दुनिया से भौंचक होकर मैं खड़ा
जरा ठहरकर सोच- समझकर
मैं भी चलना सीख रहा इस दुनिया में
इस दुनिया में मैं भी चलना सीख रहा
चलते-चलते इस पथ पर नयनो के सम्मुख धुंध बनी
प्रेम कृपाण जो पास रखी थी इस राक्षस पर कुंद बनी
लाचार खड़ा था देख रहा था कैसी ये विपत आन पड़ी
अधम दुराचार भ्रष्ट भावना मानवता की पहचान बनी
संयम मेरा इस क्रोधाग्नि में झुलस-झुलस के चीख रहा
मूंद के आँखे इस दुनिया में
अब मैं भी चलना सीख रहा
इस दुनिया में
मैं भी चलना सीख रहा





by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'



























































Monday, 20 July 2015

KEDARNATH'S BLOODY FLOOD

KEDARNATH'S BLOODY FLOOD


Chanting Mantras nourishes nature
It's we who are saints
Sacred places existing God
It's not for devil giants

Giants stay in the dark
so scary and evil things
Its we wo are giants
Humanity has two wings

We corrupt and destroy the places
Which are Heaven in the Earth
Human; enemy of humanity
It's the only pert

Nature gets rude
As we break the rules
KEDARNATH flooded
Law was broken by some fools

It's the secret place of Lord Shiva
not a picnic spot
Many evil and lusty activities
here we plot

Then it turned to an end
The Gang's flood rise
End of all creatures
who stayed aside

It's end of Humanity
As I think
They robbed the person
who were almost sink

We are greedy and selfish
having all bad things
No Mercy No Kindness
Are we Human Beings?























by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'

Wednesday, 15 July 2015

बोलो भी कब बोलोगे

22.बोलो भी कब बोलोगे


बोलो भी कब बोलोगे

गहन निद्रा को त्याग कर बंद आँख कब खोलोगे
बोलो भी कब बोलोगे

कहा चार है दो तुम भी कह दो निंदा नहीं प्यार के बोल
दूजे की निंदा छोड़ो भी अब अपने को कब तोलोगे
बोलो भी कब बोलोगे

तू भी मुसाफिर मैं भी मुसाफिर एक ही राह है मंजिल एक
साथ चलो सब मिल जुलकर बोझिल बेड़ियाँ कब तोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

मैं हिन्दू तू मुस्लिम कहता धर्मो का करते गुणगान
कोई गा रहा मौला-मौला कोई जप रहा राम-राम
ऊपर वाले से प्रीत लगाई आपस में दिल कब जोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

धर्म की सीख का पाठ पड़ा है फिर भी दुश्मन क्यों आपस में
क्या प्रेम का कोई पाठ नहीं दोनों धर्मो के सिलेबस में
या तो नहीं अच्छे हम विद्यार्थी,या शिक्षा अभी अधूरी है
धर्म ज्ञान की सीखो को अपनाना भी जरुरी है
झूठा घमंड क्यों खुद पर इतना व्यर्थ घमंड कब तोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

तू भी इंसान मैं भी इंसान क्या तेरा है क्या मेरा है
प्यार से जी लो इन चंद दिनों को यहीं जनम-जनम का फेरा है
जो प्यार भावे मन को तेरे तो कर ले अपनी मनमानी
कर धर्म की बातें व्यर्थ अनर्गल फिर किसी बात की हैरानी
लड़ो-मरो और खून बहाओ यहीं तो धर्म हमें सिखलाता है
यहीं तो तेरा कर्म यहाँ पर जिस पर तू इतना इतराता है
तभी हो सार्थक जन्म हमारा धर्म का होगा जय-जयकार
पर उसको जवाब भी देना होगा जो बैठा इस दुनिया के पार
रो- रो कहता संतानो से इन झगड़ो से मुह कब मोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'

Monday, 29 June 2015

तू जान ले इतना कहीं भगवान भी है

19 .तू जान ले इतना  कहीं भगवान भी है


 

कड़कती धूप भी है कहीं पर छाँव भी है
कहीं वीरान सी धरती बसे कहीं गांव भी है
चमकती सूर्य की किरणों से खिलखिलाता समंदर भी है
डूबे है कई लोग जिनपे नाव भी है
ठिठुरती ठण्ड है तो कही धधकती आग भी है
बने परछाइयों से वक़्त की पहचान भी है
भले तू चाह ले कितना समझना जानना इसको
भले तू जान ले लिखावट पढ़ ले पूरी पुस्तक को
बदल दे तेरे होने के दावे इस दुनिया में आने के
खिलाफत कर बगावत कर या चाहे बन जा सिकंदर तू
तू जान ले इतना कहीं भगवान भी है

तूने नाप ली धरती तो आसमान अब भी बाकी है
उसके वजूद को झुठलाने का तेरा सपना अब भी बाकी है
तुही है धर्म का रक्षक तुही पापो का सागर है
तुझी में बस रहा इंसान तुझी में हैवान भी है
ये मायाजाल दो तरफ़ा है जो देखे वो दिखायेगा
चाहे   निकलना   बाहर   तू   धंसता ही   जायेगा
दिखे है चार क़दमों की दूरी पर तेरी मंज़िल की राहें जो
वही रेत में धंसते तेरे दो पाँव भी है

मिले जो वक़्त थोड़ा सोचे बैठ ये छोटी सी दुनिया
यही तो राह है तेरी यही तेरी मंजिल भी है
यही नफरत की आंधी है तो प्यार का साहिल भी है
यही चलना संभलकर है तुझे यही भटकना भी है
कही सर झुकाना है तो कही झपटना भी है
ये अन्धो की दुनिया है जो आँख वाले हैं
ये बहरों की दुनिया है जो कान वाले हैं
कुछो में बख़्शी है ताकत नेकी की उस बनाने वाले ने
तभी भगवान कहलाने वाले कई इंसान भी हैं

by
Hem Chandra Tiwari
'MHICHA'

कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...