Saturday, 26 January 2019

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं



पुण्यवेला ये आयी है अब हर्ष बहार की बाढ़ है
संघर्षों, उन कर्मों का ये गणतंत्र दिवस प्रमाण है।

जी वीरों के दम पर ये भारत मेरा आजाद हुआ
जिन महापुरुषों के बल पर ये देश मेरा खुशहाल हुआ
जिन वीरांगनाओं की बेदी पर आज हमें यूं नाज़ है
जिन पूर्वजों की कोशिश से माँ के मस्तक पर ताज है
जिन गरीब ने न खाकर आजादी में सहयोग दिया
जिन नरेश ने मातृ के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया
मरकर भी आज अमर है जो हर भारतीय के भीतर
ऐसे मेरे आदर्शों को बारम्बार प्रणाम है।
#आजाद_पंछी



Tuesday, 21 August 2018

‌सब तेरे खुद के बस में है


‌सब तेरे खुद के बस में है

पुष्प पड़े हों राहों पर या शूल गढ़े हो हर ठोर पर
तुझको तो आखिर चलना ही है, पग अपने संभाल ले

न हो हताश क्यों तू फ़िक्र करे?बादल है प्यास बुझाने को
सब्र कर जरा, तू ठहर यहाँ, थोड़ी तो लंबी सांस ले

स्वप्नों की टूटन से न विचलित हो, फिर से पिरोना सीख इन्हें
ले विजय पताका हाथ अभी, धीरे से तू अपनी बाट ले

दबी हुई क्यों हँसी तेरी रुदते कंठों के बोझ तले? 
अम्बर भी गिरे जमीं पर जो खुलके हँस ले या चीख ले

क्या तूफ़ान बिगाड़ेंगे अब तेरा जब तू खुद मुख़ातिब होता है
‌बाहों में भरले अपने इनको या रौंद डाल तू कदम तले

‌सब खेल क्या फ़तह का है या तीस तुझे कुछ पाने की
‌संघर्ष समेटे आँचल में है, जो मंजिल तेरी हो तुझे मिले

‌तू संघर्ष कर हो कार्यरत, बन निडर, भीरु न बनकर चल
‌है लिए मशाल तू सीने में तो क्यों दीपक की राह चले

‌नहीं छिन रहा चैन तेरा सब भीतर मन का करतब है
‌जो लिया डगर पहचान अभी सब तेरे खुद के बस में है

‌सब तेरे खुद के बस में है

(सर्व अधिकार सुरक्षित, 2018, हेम चंद्र तिवारी)

Wednesday, 25 July 2018

कि मैं खुश हूँ, तू भी खुश रहना।


कि मैं खुश हूँ, तू भी खुश रहना।

कमीने इश्क़ की दास्ताँ भी क्या कहूँ
सिद्दत से करो तो भी गुनाह लगता है
सोचता हूँ रोक लूँ हर बार खुद को 
पर गुनाह फिर करता हूँ सजा पाने को।
कि मैं खुश हूँ, तू भी खुश रहना।

न जाने कितनी दुआओं में माँगा तुझे
अब तो ख़ुदा भी मुझसे खफ़ा लगता है
सोचता हूँ समझा लूँ हर बार खुद को 
पर मिन्नतें फिर करता हूँ तुझे पाने को।
कि मैं खुश हूँ, तू भी खुश रहना।

हाँ दीवाना हूँ। इसका भी अपना मज़ा है,
ज़ख्म इतने हैं,दर्द भी अब मरहम लगता है
सोचता हूँ क़तल कर दूँ हर बार खुद को
पर फिर भी जिंदा रहता हूँ तुझे मनाने को।
कि मैं खुश हूँ, तू भी खुश रहना।

Sunday, 22 July 2018

ना तुमने जाना मुझे ना समझा मेरा प्यार
कहूँ तो कहूँ कैसे अपने दिल का हाल
नहीं सुना तुमने कभी जो दिल ने कहा
क्यों फेर ली नज़रें तुमने न देखा मेरा प्यार
फिर भी साथ हो हरदम यूँ जताती क्यों हो
जो पहले ही पागल है तेरे प्यार में
उसे और पागल बनाती क्यों हो?

हाँ दौर बदले हैं, जमाना भी अब वो नहीं
तुम अब नहीं साथ और मैं भी वहाँ नहीं
फिर भी तुझको दिल सोचता क्यों है
ये तेरा आशिक़ मुकद्दर को कोसता क्यों है?
आज भी तुम यादों से मुझको सताती क्यों हो
जो पहले ही पागल है तेरे प्यार में
उसे और पागल बनाती क्यों हो?

तू चाहे किसी और को हमसफर बना ले
किसी और के शहर को अपना घर बना ले
जब भी मिलेंगे कभी किसी भी मोड़ पर
मैं फिर इजहार करूँगा, तुझसे ही प्यार करूँगा
पहले लड़ती हो मुझसे फिर मनाती क्यों हो?
जो पहले ही पागल है तेरे प्यार में
उसे और पागल बनाती क्यों हो?

कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...