Saturday, 5 March 2016

A LETTER TO INDIA PM NARENDRA MODI

आदरणीय प्रधानमंत्री
श्री नरेन्द्र मोदी जी

आपके प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही मैंने भाजपा पार्टी की सदस्यता ग्रहण की क्योंकि आपकी बातों में जो दम था, उसे कर दिखाने की पूर्ण प्रतिभा और साहस आपमें कूट-कूटकर भरा है। आपने हर क्षेत्र में बहुत से बदलाव किये और काफी ऐसे महत्वपूर्ण कदम उठाये जो वाकई सराहनीय हैं।

अभी-अभी हरियाणा सरकार ने 5 समुदायों को आरक्षण देने का जो ऐलान किया है क्या वाकई आप उससे सहमत हैं? इनमें से एक वही जाठ समुदाय भी है जिसने अभी कुछ समय पहले सङकों पर नंगा नाच किया। जब आप सत्ता में आये तो जनता (युवाओं) को आपसे काफी सारी उम्मीदें थी कि आप ऐसे कदम उठाएँगे जो कदम उठाने की हिम्मत शायद किसी ने नहीं की, पर आज जब देश के युवा जिनकी तादाद इन चंद लोगों ( जो आरक्षण की माँग कर कहे हैं) से कई गुना ज्यादा है फिर भी राजनीति की दिशा उसी ओर है जिस पर पिछली सरकार 60 सालों से चली आ रही थी।

CONSEQUENCES OF NEGLIGENCE: A POETRY


Land turns into ashes, the sky is lost        
There's a huge crowd but at rest
Died and dried relics
And shambles're the only evidences
Negligence causes disaster
Blind trust, 'the womb', nourishes the seeds which grew up to a hope,
Broken roots fruit and ashes are fertile
Damn!!! I've nothing,
But the stupid hope



 

Wednesday, 2 March 2016

STOP CHILD SEXUAL ABUSE

There are many cases of child molestation in India.... I was shocked when I heard from one of my dear friend when she told me that she was molested and faced sexual abuse only in 11 by one of her known relative....

Some child never told their guardian/ parents about these cases but what if parents ignore and don't take any action against the accused person rather than they support them directly or indirectly sometimes...... What if the accused is one of your relatives and parents try to shut your mouth in public...... I heard in many cases own father of victim molests..... Victims cousins, neighbors and other person molest......





Need to aware the children, care them and treat them as a friend.... Need to support them morally and legally if they face such problems...

It's very shameful for all of us that these types of cases are very common at present time but each couldn't get the light of justice and are still in the dark rooms.....




Monday, 22 February 2016

देशद्रोहियों की पहचान हो गयी है अब सबक सिखाना बाकी है.......

देशद्रोहियों की पहचान हो गयी है
 अब सबक सिखाना बाकी है.......








बस कह दिया कहकर जो सबसे बङा गुनाह कर गये
पुछल्लों को मतलब पता नहीं और ताली बजाते रह गये
अफजल को शहीद और तिरंगा को बदनाम कह गये
वतनपरस्तों की शहादत पर दाग दे गये

शर्म आती है देश के जयघोष में जिन्हें, उनको सच्चा देशभक्त कह गये
आग लगाने वालो की कमी नहीं यहाँ, सारे नेता हाथ सेकते रह गये

सबसे बङा जुर्म अपराध माँ के अपमान का, चुपचाप सह गये
इनके सारे उसूल, गैरत, संस्कार आज गटर में बह गये
आज तो अपनी ही माँ को ये कठुए गंदी गाली दे गये
कैसे जवाब दूँ माँ तुझे, तेरे अपने ही तुझे नोचते रह गये

पर मैं तेरा पूत, माँ तुझे कोई हानि न होने दुँगा
सर काट कर रख दूँ  द्रोहियो का, वक्त पर कुर्बानी भी दूँगा

माँ तुझे सलाम.......
भारत माँ की जय


#mhicha














Wednesday, 17 February 2016

A SHORT STORY FROM PAST MEMORIES


A SHORT STORY FROM PAST MEMORIES

                                                                                                                                        March 25, 2011, Friday

I lived in Delhi from April 2008 to September 2011. Robin was one of my close friends and we spent most of time together those days. One day he insisted me to go his village with him to attend the Naming Ceremony of his nephew. We planned the trip together and reached his village, Maduli (15 kilometres ahead from Bhikyasen, Uttarakhand) in the morning of the day 25 March, 2011.

Thursday, 14 January 2016

प्रभावशाली कौन?


प्रभावशाली कौन?

एक प्रश्न जो कभी मन में तैरता था, आज एकाएक एक सूनामी बनकर मेरे सामने खड़ा हो गया-
‘प्रभावशाली कौन?’

बात सामर्थ्य, पौरुषत्व, समृद्धता की नही बल्कि व्यवहारिक सत्य की है| टूटते हुए आशियाने की जब-जब दीवारो में दरारें पड़ती हैं या एक ईंट या पत्थर टूटकर ज़मीन पर गिरता है, तो घर में रहने वालों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय होता है| घर का हर सदस्य उस घर के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए हर संभव प्रयास करता है | वही प्रयास मैं भी इस लेख के माध्यम से कर रहा हूँ|

जीवन एक समझौता है

जीवन एक समझौता है
 
निर्जीव जी उठ चलता नही
जी सकते है जो, जी रहे
जीवन अर्थ न समझ पाए
केवल स्वास ही पी रहे
पर्याय सूझने पाए ना
तो दुख अंततः होता है
ए प्राणी! जीना सीख ज़रा
ये जीवन एक समझौता है

Monday, 11 January 2016

NATIONAL YOUTH DAY: 12TH JANUARY


                                   





Dear all readers,

I wish you all a motivational, energetic and glorious National Youth Day (Yuva Diwas). As In 1984 Indian government decided to celebrate today 12th January, Swami Vivekanand Birthday as National Youth Day from 1985 onwards. Swami Vivekanand is a legend from the past history to all youths. His experiences and deeds in his life are inspirational to all youths. He showered his wisdom and the glory of India on whole mankind worldwide. It could not shine the sun of Indian culture and philosophy in whole world but he made it by his affective speech and wisdom.

INDIAN CONSTITUTION: a poem


INDIAN CONSTITUTION
 
It’s not an ordinary book
It’s the pride of India

It’s the respect for the people

It’s the respect for the country

It’s the savior of humanity

Sunday, 10 January 2016

एक कहानी: आगे पढ़ें 1


 आप पढ़ चुके हैं- http://amazingthou.blogspot.in/2016/01/blog-post_9.html

इस बार लड़की ने जवाब दिया, “ मारिया”..................................

आगे की कहानी.........

“मारिया!”  राजू की मा ने आश्चर्य के साथ धीमे स्वर में दोहराया| वह क्रिस्चियन लड़की उनके गाँव में क्या कर रही थी? उनके गाँव में तो कोई क्रिस्चियन है ही नहीं| तो ये लड़की कौन है और यहाँ कैसे आई? फिर वही बातें उसके दिमाग़ में चक्कर काटने लगी| पर व्यर्थ सिर खपाने से कोई लाभ न था|

Saturday, 9 January 2016

एक कहानी


दूर कहीं शुष्क घाटियों में, रात के घनघोर अंधेरो में, तारों से भरे हुए आसमान को देखना राजू को बहुत पसंद था| राजू एक ग़रीब घर में पैदा हुआ, अपाहिज बच्चा था; जिसके पिता एक सुलझे हुए किसान थे, जिनके पास कुछ ही बीघा ज़मीन थी| ये ज़मीन पश्चिमी घाटों के  पास होने के कारण सिर्फ़ धान की खेती कर पाना ही मुनासिब था| पिछले दो सालो से समय  पर बरसात ना होने के कारण फसल अच्छी नही हो पाई थी और राजू के पिता पर आर्थिक बोझ आ गया था| राजू अभी आठ साल का था और इन बातो को समझने के लिए बहुत ही छोटा| राजू के पिता एक तो फसल नष्ट होने की वजह से दुखी थे और दूसरा उन्हे राजू के भविष्य की चिंता अंदर ही अंदर  सताए जा रही थी| वे जानते थे कि पैरों के बिना जीवन कितना मुश्किल होता है, वह भी जब ,वो राजू को एक किसान के रूप में ही देखना चाहते थे |परंतु राजू के अपाहिजपन ने उन्हे भीतर से खोखला कर दिया था| राजू की मा एक आदर्श पत्नी और मा दोनो ही थी, जो अपना कर्तव्य बहुत ही तन्मयता से निभा रही थी| राजू के पिता ने राजू को लेकर अपनी परेशानियों को ,कभी भी, किसी के सामने जाहिर नहीं होने दिया| पर आज उन्हे ये बात बहुत ही परेशान कर रही थी कि आख़िर राजू के भविष्य की दिशा किस ओर होगी? वह किस तरह से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करेगा? समाज में अपाहिजों के हालात उन्होने देखे थे| वो अपने बच्चे के भविष्य की इस कठोर कल्पना से काफ़ी विचलित हो जाते थे| वह राजू को इस तरह से जीवन यापन नहीं करने देना चाहते थे| पर जब भी वह इस बारे में सोचते , उन्हे कोई भी रास्ता नज़र नहीं आता था और वो हताश होकर एक छोटे बच्चे की तरह किसी चमत्कार के होने की कामना करते रहते थे | राजू की मा उनकी इस मनोस्थिति को जानती थी ; पर उसने उनसे इस बारे में कभी कोई बात नहीं की| वह उन्हे और दुखी नही करना चाहती थी| वह हमेशा उनके सामने अपने बच्चे को परियों की कहानिया सुनाया करती थी, जिसमे तरह-तरह के चमत्कार की बातें रोज सुनने को मिलती थी| राजू के पिता मन ही मन राजू को उन  परियों की कल्पना में ही छोड़ देना चाहते थे| कभी कभी जब राजू की मा उसे कहानी सुना रही होती और उसके पिता वही होते तो वो उसकी मा को ध्यान से सुनते और परियों की कल्पना में खो जाते कि कोई परी उनके बच्चे के जीवन को भी सुधार दे| उनकी मा भी बचपन में उन्हे इसी तरह की कई कहानियाँ सुनाया करती थी| पर वास्तविक जीवन में इन कहानियों का कोई अस्तित्व नही था, ये बस एक अच्छी और  रोमांचक कल्पना मात्र थी और राजू के पिता ये भली भाँति जानते थे|



कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...