Sunday, 4 February 2018

कासगंज: बोलो भी कब बोलोगे?



बोलो भी कब बोलोगे
गहन निद्रा को त्याग कर बंद आँख कब खोलोगे
बोलो भी कब बोलोगे

कहा चार है दो तुम भी कह दो निंदा नहीं प्यार के बोल
दूजे की निंदा छोड़ो भी अब अपने को कब तोलोगे
बोलो भी कब बोलोगे

तू भी मुसाफिर मैं भी मुसाफिर एक ही राह है मंजिल एक
साथ चलो सब मिल जुलकर बोझिल बेड़ियाँ कब तोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

मैं हिन्दू तू मुस्लिम कहता धर्मो का करते गुणगान
कोई गा रहा मौला -मौला कोई जप रहा राम- राम
ऊपर वाले से प्रीत लगाई आपस में दिल कब जोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

धर्म की सीख का पाठ पड़ा है फिर भी दुश्मन क्यों आपस में
क्या प्रेम का कोई पाठ नहीं दोनों धर्मो के सिलेबस में
या तो नहीं अच्छे हम विद्यार्थी, या शिक्षा अभी अधूरी है
धर्म ज्ञान की सीखो को अपनाना भी जरुरी है
झूठा घमंड क्यों खुद पर इतना व्यर्थ घमंड कब तोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

तू भी इंसान मैं भी इंसान क्या तेरा है क्या मेरा है
प्यार से जी लो इन चंद दिनों को यहीं जनम-जनम का फेरा है
जो प्यार न भावे मन को तेरे तो कर ले अपनी मनमानी
कर धर्म की बातें व्यर्थ अनर्गल फिर न किसी बात की हैरानी
लड़ो-मरो और खून बहाओ यहीं तो धर्म हमें सिखलाता है
यहीं तो तेरा कर्म यहाँ पर जिस पर तू इतना इतराता है
तभी हो सार्थक जन्म हमारा धर्म का होगा जय-जयकार
पर उसको जवाब भी देना होगा जो बैठा इस दुनिया के पार
रो- रो कहता संतानो से इन झगड़ो से मुह कब मोड़ोगे
बोलो भी कब बोलोगे

Thursday, 28 December 2017

तीन तलाक़ के आरोपियों को होगी जेल...


तीन तलाक़ के आरोपियों को होगी जेल...

जी हाँ। सायरा बानो की पहल अब सच होने जा रही है। पिछले कई सालों से तीन तलाक़ कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलायें अब इससे छुटकारा पाने जा रही हैं। 

दरअसल भारत में तीन तलाक़ का दुरूपयोग होने से इसने विगत कई वर्षों में कुरीति का रूप ले लिया है। जिससे पीड़ित महिला सायरा बानो ने इसके खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की थी। जिसे संज्ञान में लेते हुए न्यायलय ने सरकार को इस विषय पर कानून बनाने का आदेश दिया था।

आज लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित हो गया है जिसके तहत तीन तलाक़ के आरोपी को 3 वर्ष तक की कैद के साथ साथ जुर्माना भी हो सकता है। हालांकि यह  विधेयक अभी राज्यसभा में पारित होना अभी बाकी है।

Saturday, 23 December 2017

कलम


मेरा साया जब जब कोरे कागज़ पर पड़ा
एक नया रूप लेकर शब्दों में उभर आया
एक दौर जो बीत गया मेरा ही था
आज ये दौर भी मेरा ही है 
और कल भी मेरा ही रहेगा।

लोगों की उम्र बढ़ती चली गयी
शरीर जीर्ण, शक्ति क्षीण होती गयी
ज्यों ज्यों मेरी उम्र बढ़ती गयी
मेरी ताक़त और ज्यादा बढ़ती गयी

न जाने अब तक कितनो का साथ निभाया मैंने
मैं न जाने कितने असहायों का सहारा बना
न जाने कितने फरियादियों को इन्साफ दिलाया मैंने
मेरा वज़ूद हमेशा रहेगा

जब तक तेरे हाथों से दूर हूँ तो मजबूर हूँ
पर जब तेरे हाथों में आता हूँ तेरी ताक़त बन जाता हूँ
मैं कलम हूँ।
मुझे संभाले रखना अपने दिल के क़रीब
कल फिर तुझे मेरी ही ज़रुरत होगी।

Tuesday, 5 December 2017

अधूरा इश्क़



फ़लसफ़ा मेरी यारी का कुछ ऐसा रहा
कुछ मेरे कुछ उसके अरमानो का जनाज़ा निकला
और फिर भी शहनाइयां बज रही थी अपनों के घर
मिलती आवाज़ें थीं और मिलते दस्तूर भी
पर ज़िन्दगी के मायने कुछ बदले हुए से थे।

अधूरे इश्क़ की दास्ताँ कुछ ऐसी थी
न वो रूठे हमसे न हम ही उनसे रूठे थे
हर वफ़ा सच्ची थी हर वादे झूठे थे
बस ये समझ लीजिए ज़नाब
वो आज भी अधूरे हैं जो कल तक अधूरे थे।
#mhicha

Saturday, 2 December 2017

न जाने किस तलाश से गुज़र रहा है दिल कुछ दर्द भी है कुछ अक्स भी तन्हाइयों में कहते हैं मुद्दत से मिलता है प्यार कई मन्नतो से ऐ खुदा मुझे मेरी अर्ज़ियों का हिसाब देदे।


न जाने किस तलाश से गुज़र रहा है दिल
कुछ दर्द भी है कुछ अक्स भी तन्हाइयों में
कहते हैं मुद्दत से मिलता है प्यार कई मन्नतो से
ऐ खुदा मुझे मेरी अर्ज़ियों का हिसाब देदे।
#mhicha

पहाड़ी गीत.... गायक: त्रिभुवन महरा

मेरे मित्र त्रिभुवन महरा जी के इस गीत को सुनें एवं बताएं कि आपको कैसा लगा। पिथौरागढ़ के उभरते सितारे। मुझे यो ये आवाज़ काफी मीठी लगी यदि आपके दिल को भी ये आवाज़ छू जाये तो ज़रूर शेयर करें।


Tuesday, 21 November 2017

दैत्य!!!







आज मैं एक यौवन के बाग में पहुँचा। तरह- तरह के मनभावन खिले थे चारो ओर और वह बाग़ किसी स्वर्ग से कम नहीं था। नन्ही सी कलियाँ अपने यौवन सौन्दर्य को और अधिक निखारने को लालायित थीं। मैं बाग़ में आगे की ओर चल दिया और उस बाग़ की सुंदरता को निहारने लगा। तभी अचानक मेरी नज़र उस बाग़ के माली पर पड़ी जिसके चेहरे पर चिंताएं साफ़ देखी जा सकती थी।
 वह काफी लाचार दिखाई दे रहा था। मैं अचंभित था कि यने सुन्दर बाग़ में कोई इतना उदास कैसे हो सकता है? और वो भी वह व्यक्ति जिसने उस बाग़ को विकसित करने में अपना पूर्ण जीवन लगा दिया। मैंने उस व्यक्ति से उसकी परेशानी का कारण पूछा। उससे पता चला कि दैत्यों की एक टोली उसकर बाग़ के सौंदर्य को नष्ट कर रही थी। हर रोज़ कोई न कोई कली उनकी हैवानियत की भेंट चढ़ जाती। उस बाग़ का सौंदर्य उन दैत्यों के पैरों तले कुचला जा रहा था। यह सब सुनना वाकई बहुत दुखदायी और हृदयविदारक था। तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी। अरे! यह तो वही राक्षसों की टोली थी जो इंसानो की शक्ल वाले थे। अब मैं निराश था और शर्मिंदा भी....

#mhicha

Saturday, 18 November 2017

क्यों? क्या घिन आती है हमसे?

क्यों? क्या घिन आती है हमसे?
हमारा तो काम यही है, 
थककर चूर होते हैं जब
आराम यहीं है।


बंद चार दिवारों में रहते हो
हमे दुत्कारते हो
खिड़की से कूड़ा फेंक सड़क पर
रौब झाड़ते हो
जब देखते हो सड़क पर
पैरो की धूल समझते हो
हमें मवेशी से भी घटकर
क्यों मानते हो???

कल ही तो एक कुकुर
और लेकर आ गए
सेल्फी अपडेट करके
सोशल मीडिया पर छा गए।
हमसे पूछने हाल कभी
क्यों न आते हो तुम
क्यों कभी हमें अपना
घर ले जाते हो तुम????

सब गंदगी तुम्हारी 
हम साफ़ करते हैं।
तुम ही बोलो 
क्या कोई पाप करते हैं।
मिलते हो जिससे भी
कहते हो कि 
हमारा तो यही धंधा है
दिल पर हाथ रख कह दो
हम गंदे हैं या कौन गन्दा है???

सफ़ेद कपड़ो की चमक तुम्हारी
सब कुछ तो कह गयी
दिल की बातें हमारे दिल में ही रह गयी
फिर क्यों न सोऊँ यहीं
कूड़े के ढेर में
माने मेरे सपनो की दुनिया
है फिर से ढ़ह गयी।
#mhicha

अगर इन पंक्तियों में आपको इन अभावग्रस्त बच्चो के मन की बात सुनाई दे तो कृपा करके अपने सभी मित्रों के साथ साझा करें एवं उनसे आग्रह करें कि कभी इन बच्चों को देखकर मुँह न फेरें और न ही इन्हें लताड़ लगाएं अपितु इनके पास जाकर हरसंभव मदद करने की कोशिश करें और खुद भी ऐसा करें।

विनम्र निवेदन!
हेम चंद्र तिवारी

Monday, 13 November 2017

बाल दिवस

आज का दिन बहुत खास है। 14 नवंबर, बाल दिवस का दिन। सभी लोग बधाइयाँ देंगे एक-दूसरे को। विद्यालयों में तरह-तरह के कार्यक्रम होंगे। नन्हे-मुन्हे बच्चे जो पहले से ही संपन्न परिवारों से हैं उन्हें उपहार दिए जाएंगे और शायद आज का दिन उन गरीब बेसहारा बच्चो की भी ईद साबित हो जाये जिन्हें दो वक़्त का भोजन नसीब नहीं होता। कितना अच्छा लगता है मन को यह सोचकर कि आज बाल दिवस के दिन किसी बेसहारा बच्चे की मदद कर दी।

फिर आएगा कल का दिन 15 नवंबर। और फिर क्या? सब पहले जैसा। सड़क पर मांगने वाले बच्चों का हुजूम और उन्हें भीख देने वाले और फटकारने वाले आप और मुझ जैसे ही लोग जिन्होंने एक दिन पहले ही बाल दिवस मनाया था, सब कुछ भूलकर, अपने कार्यो में फिर से व्यस्त।

आओ
अबकी बार
हर दिन एक बाल दिवस हो
हर दिन उस गरीब बालक के जीवन में दिवाकर प्रभात फेरी लगाये
खुशहाली उसके चेहरे पर और मुस्कान होठो पर हो
दरिद्रता उससे कोसो दूर हो
शिक्षा, आहार, स्वास्थ्य एवं आशियाना उसके साथी बने
हँसी की किलकारियों से हर वो सड़क गूंजे जहाँ कभी दरिद्रता की करुण आवाज़ दुहाई देती थी

समस्त नागरिको से अपील है कि हमेशा जब किसी ऐसे बेसहारा और दरिद्र बच्चे को सड़को पर देखें तो उसे अनदेखा न करें या उसकी थोड़ी सहायता करके अपने दायित्वों की खानापूर्ति न करें। वरन स्थानीय लोगो की मदद से एवम स्वयं के प्रयासों से उसे किसी बाल संस्था या प्रशासन के सुपुर्द कर मानवता का परिचय दें।

हेम चंद्र तिवारी की ओर से आप सभी मित्रों को बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Thursday, 13 July 2017

हुँकार




हौंसलों  को देख हमारे
खौफ़ तो खाते ही हो तुम
जिस दिन ठान लेंगे हम
कसम से,
वो दिन तुम्हारा आख़िरी होगा।

बहुत पैगाम देते हो मिडिया पर
आतंक की नुमाइंदगी का
जिस दिन गरजेंगे हम तुम पर
कसम से,
वो पैगाम तुम्हारा आख़िरी होगा।

ख़ुदा को बदनाम कर रहे
तुम वहशी भेड़िये कायर हो
जिस दिन आमना-सामना होगा
कसम से,
वो मुक़ाम तुम्हारा आख़िरी होगा।

दुआ करो खुद़ा से वो दिन जल्द आये
तुम जन्नत की सैर करो और हूर तुम्हारे पैर दबाये।

बहुत खून की नदियाँ बह चुकी
जेहाद के नाम पर धरती में
जब कफन बाँधकर निकलेंगे हम
कसम से, 
वो जेहाद तुम्हारा आख़िरी होगा।
#mhicha

कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...