Saturday, 8 October 2016

अधूरी हसरतें...........

अधूरी हसरतें...........

कुछ तो कहा होता
कुछ तो सुना होता
हमारे प्यार का कुछ तो
ताना बाना बुना होता
मुकम्मल होता
महकता साँसों में
उस वक्त
जब मैंने तुझे चूमा होता

थम जाती साँसें
रक्त उफान पर होता
आँखों की जुगलबंदी होती
इश्क मुकाम पर होता
दिल की चौखट पर
दस्तक तो तेरे भी होती
अगर मैं कुछ यूँ
बदनाम न होता

तेरा शर्माना भी जायज होता
मेरा मनाना भी जायज होता
तू बाहों में झूले झूला करती
तुझको सीने से लगाना भी होता
मेरे कंधों पर तेरा सर होता
उसे प्यार से सहलाना भी होता
ये सब कुछ होता अगर
दिल से तूने अपनाया होता

By
Hem Chandra Tiwari
mhicha

Monday, 26 September 2016

प्रेम गीत..... ओ बेवफ़ा... ओ बेवफ़ा

Pic credit to SHIPTA BISHT
एक दिन
याद मेरी भी तुझे आएगी
ओ बेवफा-2
जो दर्द
तुने दिया मेरे दिल को
वो दर्द तुझे दे जाएगी-

मैंने तुझे था अपना माना
तू ही था आशियाना
क्या पता था उस आशियाने से
मेरे प्यार की अर्थी जाएगी

एक दिन
याद मेरी भी तुझे आएगी
ओ बेवफा-2
जो दर्द
तुने दिया मेरे दिल को
वो दर्द तुझे दे जाएगी-

याद है
तेरी आंखों का काजल
तेरी साङी का आँचल
क्या पता था ये बिन्दियाँ तेरी
मेरे दिल में यूँ गङ जाएगी........

एक दिन .....
याद मेरी भी तुझे आएगी
ओ बेवफा-2....
जो दर्द ....
तुने दिया मेरे दिल को
वो दर्द तुझे दे जाएगी-....

तुझे पाने का न शौक रहा
खुद को ही आग में झोंक रहा
क्या पता था माथे का सिन्दूर तेरा
मेरी अस्थि बन जाएगी........


एक दिन ....
याद मेरी भी तुझे आएगी
ओ बेवफा-2.....
जो दर्द ...
तुने दिया मेरे दिल को
वो दर्द तुझे दे जाएगी-...


By
Hem Chandra Tiwari
mhicha

Wednesday, 21 September 2016

उरी के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

दिल मिलाने चले थे तब, अब पूरी घाटी दहल उठी
पुरानी राख बुझी नहीं कि और चितायें जल उठी
फिर अमन के फूल बरसेंगे कि पाकिस्तान बदल गया
जख्म पर जख्म भूले नहीं, एक ताजा जख्म और मिल गया
खैर,
सियासी रंगत तो दिखती रहेगी

न जाने कितनी और लाशें बिछती रहेगी
हिसाब लगा सको तो लगा लो
             'शहादत' का
हर बार मेरी कलम लिखती रहेगी।

मरे नहीं जवान, कतले-ए-आम हुआ
और खामोशी लौट आयी
मेरे देश की न जाने ये कैसी बदनशीबी छायी
हजारों अस्त्र- शस्त्र भी व्यर्थ हैं अब जो
उनकी मौत का प्रतिशोध न ले पायी,
तब,
लहु भी खौलकर वाष्प हो गया
चिंगारी भी न जला सका
नियमादेश के बोझ तले, खुद की रक्षा न कर सका।

अरे! आधा तो पहले ही छोङा, अब आधा न सम्भाल सके
गद्दार आवारा सांडों को तुम नकेल न डाल सके
क्या मजबूरी? क्या बाधा?  जो अब तक न उपचार किया
शस्त्र उठा प्रतिशोध लो उनसे जिसने भीषण नरसंहार किया

सीमा पर घुसकर जो कातिल अपनी सीमा लांघ गये
क्यों न जवाब दो मुँहतोङ? क्या हाथ तुम्हारे बाँध दिये?
ये जन्म तुम्हारा, जन्मभूमि भी, फिर किसका खौफ सता रहा?
ऐ भारत के वीर सपूतों! ये भारत तुम्हें बुला रहा।

उठा लो अपनी बंदूकें, छलनी कर दो सीना दुश्मन का
सच्ची श्रद्धांजलि शहीदों को, तब बोझ मिटेगा निज मन का
जो विघ्न डाले इस कार्य में, उसको भी धूमिल कर डालो
ऐ भारत के वीर सपूतों! इतिहास पुन: तुम रच डालो।

By
Hem Chandra Tiwari
Mhicha

Saturday, 16 July 2016

#kashmir#violence


न वादियों में खुशबू है, न रौनक है घाटी में
माटी के लाल, माटी खातिर, मिल रहे माटी में
चंद घुसपैठियों से घातक, ये भीङ पुछल्लों की
क्या यही तुम्हारी देशभक्ति जो बिक रही घाटी में

न जाने क्या स्वप्न तुम्हारा क्या आरजू है दिल की
नफरत के दंश दिये हैं बस, है शक्ल तेरी कातिल की
है शक्ल तेरी कातिल की, अल्लाह बोलो चाहे मौला
बंद करो आतंकवाद, अब खून हिन्द का खौला
खून हिन्द का खौला, अब पङेगा तुम पर भारी
इस्लाम के नाम पर मौत का तांडव, घर-घर गोलाबारी
घर-घर गोलाबारी बन गयी सिसकियाँ कई कंठों की
प्यार की भाषा समझ न आयी अब बातें होगी डंडों की
डंडों की बातें भाती है तुमको तो ये भी तुम्हें चखायेंगे
सौगन्ध है भारत माता की अखंड भारत बनायेंगे।

भारत माता की जय!

Hem Chandra Tiwari
(c), 2016, mhicha

Friday, 15 July 2016

अब थोड़ा मुस्कुरा

खुद की तलाश मैं कर रहा
रातों में करवट बदल रहा
सुबह के उजाले से भागकर
दिखते अंधेरों में जल रहा

ये बंदिशें......  ये बंदिशें....
जीने नहीं देंगी
ख्वाहिशें...... ये ख्वाहिशें.....
मिटने नहीं हैं अभी

खुद को पहचान ले
अपने को जान ले
परवाह न दूसरों की
मन की तू मान ले

कहता है दिल......  अब थोड़ा मुस्कुरा
दिल की तू सुन जरा
अब थोड़ा मुस्कुरा
दिल की तू सुन जरा

(c), 2016, #mhicha

Sunday, 10 July 2016

मजहब


धर्म नहीं, जैसे विज्ञापन हो गया
मजहब अब शासन हो गया
यूँ हिली दीवारें धूमिल मिला खंडहर
कि हर जगह मातम छा गया

#mhicha

Sunday, 19 June 2016

बरसात हूँ मैं, बरसूँगी ही

बरसात हूँ मैं, बरसूँगी ही
सदियो से बरस रही हूँ, समय पर
जब-जब ताप बढ़ा है- धरा पर
तिलमिलाता हुआ जीवन हुआ गर्मी से
जब-जब भानु लाल हुआ- गगन पर
मैं खुद से ही पृथक हो गयी
बूँद-बूँद कर तरल हो गयी
अपनाकर धरा को गले लगाकर
उसका ताप निगल मैं भस्म हो गयी
पर अहं नहीं
उसने भी तो अपनी बाहों में कभी संभाला मुझे
तो उसकी रक्षा तो करूँगी ही
बरसात हूँ मैं, बरसूँगी ही
#mhicha

Tuesday, 14 June 2016

विरह वेदना




बरस जा, ए बादल! तू लाख मर्तबा
भिगो दे ये जमीं ये आसमाँ
तन गीला कर या मन में ले समा
तेरी मंद-मंद मुसकुराहट
और भावमयी संवेदना से
न मचलेगा मेरा जी
चाहे हों लाख जतन तेरे
छुप जाये आँखों की नमी
तेरी लाख कोशिशें मुझे रिझाने की
व्यर्थ हैं- मुझ पर.........
मै प्यासी हूँ, पर मिलन की
प्रीत को गले लगाने की
उसकी बाहों में बिखरकर बह जाने की
उसकी साँसों से दिल की हसरतें मिटाने की
उसके प्यार भरे लबों से प्यास बुझाने की
तेरा बरसना व्यर्थ है मुझ पर
ए सावन!
तू बढ़ा तो देगा मेरी वेदना
पर क्या मिला पाएगा मेरे प्रिय से?

#mhicha

Monday, 13 June 2016

मानवता चहके चहुँ ओर

काश!
एक बार फिर चमन में वो फूल खिले
जिसकी खुशबू में अमन की महक हो
काश सूर्योदय फिर ऐसा हो गगन में
हर ओर प्रकाश हो, स्वच्छता दिखे
मन साफ, बैर रहित, समाजहित में कार्य हो
और मानवता चहके चहुँ ओर-
मैं अभी जीवित हूँ।

Tuesday, 7 June 2016

त्यर हौंठुलै म्यर हौंठुकै लाल करी जा


त्यरी म्यरी यारी मा प्यारी जिउन उठी बहार वे
चानै चानै टुकी मा ल्हैगो प्यारू कौ बुखार वे
सुन दगङी ब्याऊ कै मुलाकात करी जा
त्यर हौंठुलै म्यर हौंठुकै लाल करी जा

ठाङ चढैई कौ धार मा, कोसी को किन्यार मा
दिन हैबेर सांझ लागीगै त्यरै  इंतजार मा....2
तू ऐजा दगङी सटपट ऐजा, दिल रङीगो त्यरै प्यार मा

त्यरी म्यरी बातूँ मा हैगे प्यार की बरसात वे
दखनै चानै बी लै हैंगई स्युन फुटीबेर पात वे
सुन दगङी ब्याऊ कै मुलाकात करी जा
त्यर हौंठुलै म्यर हौंठुकै लाल करी जा

तीस मिटानी पाणी ज्यसी बानी
संगीत बजानी पैरूँ कौ छम छम छम
तापी घामम छाउ जस आँखुकौ काजल
त्यरी हँसणी मुखङी मा मर मिटु हम
चाल चमकुङी जस बिंदुली त्यरी
हाथों कु चूङियांकू खन खन खन
त्यर खुली बालूँकु सोचीबे बैठ्यु
कुढी घरबार बिसरीगु हम

त्यर म्यर इकरार मा ज्यसी चल पङी बयार वे
चानै चानै टुकी मा ल्हैगो प्यारू कौ बुखार वे
सुन दगङी ब्याऊ कै मुलाकात करी जा
त्यर हौंठुलै म्यर हौंठुकै लाल करी जा

#mhicha

Sunday, 5 June 2016

सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को

सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को
थोड़ा बदलेगा उसके व्यवहार को
बदलना तो दूर की बात
बढ़ा लिया है अपने पाप को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को

कहीं पे चोरी,कहीं पे दंगे
मार रहे हैं सब भूखे और नंगे
सोचा था बढ़ाएगा भाईचारे को
प्रेम को, सदभाव को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को

एक हाथ से पैसा लेते, एक हाथ से काम कराते
फिर उसी पैसे के लिए एकदूसरे को मारते काटते
किसी दिन चबा जाएँगे समाज को
इस देश को, इस संसार को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को

धर्म को मज़ाक बना दिया है
कैसा था अब कैसा बना दिया है?
बाँट दिया है दुनिया, समाज को
इंसान को, भगवान को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को

अमीर, ग़रीब का भेदब नाकर
दबा दिया है इंसान को
बेच दिया है ईमान को
सम्मान को, पहचान को
सोचा था बदलाव बदल देगा इंसान को
BY
GAURAV NAILWAL
CLASS- 9TH
MOUNT OLIVET SR SEC SCHOOL
BURARI, DELHI-84

कई भाई लोग साथ आ रहे हैं, अच्छा लग रहा है, एक नया भारत दिख रहा है। आजाद हिंद के सपनो का अब फिर परचम लहरा है। उन्नति के शिखरों में अब राज्य ह...